मजनू आजकल रिक्शा चलाता है . जो कमाता है शराब और गुटके की पुड़िया में उड़ा देता है . उसकी मेहरारू बिशनसिंह की मेहरारू कहलाती है .यही पक्का नाम है मजनू का . एकदम छुईमुई सी पतली दुबली अगर बच्चों की पलटन साथ न हो तो कोई मान ही नहीं सकता कि वह पांच बच्चों की माँ है . कितने बरस की हो के सवाल पर वो उँगलियों पर गिनने का उपक्रम करती है -एक ठो पांच बीसी तो हो गए दीदी जी . सिर्फ पच्चीस साल , जी दीदी जी सलमान का बाप ठहरा मौसे कोई दसेक बरिस बड़े . तो उ ठहरे पैतीस क .नसा ने खा लिए . . तू रोकती नहीं .वह मुस्कराई थी .खर्च कैसा चलता है -दो ठो देवर है गाँव के ओही खर्चा चलावत है सगरा . वह मानवती मुझे अनुत्तरित कर चली गई .
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